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Fight for what you believe in


पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने

पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने

ज़िंदगी भीख में नहीं मिलती
ज़िंदगी बढ़ के छीनी जाती  है
अपना हक़ संगदिल ज़माने से
छीन पाओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने.…

रंग और नस्ल  जात और मज़हब
जो भी हो आदमी से कमतर है
इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तराह
मान जाओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने.…

नफ़रतों के जहाँ में हमको
प्यार की बस्तियाँ बसानी है
दूर रहना कोई कमाल नहीं
पास आओ तो कोई बात बने

पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने

~ साहिर लुधियानवी
संगीत :- एन.दत्ता
गायक :- मो. रफ़ी
चित्रपट :- नया रास्ता १९७० 

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